मेरी कामवाली मुझसे बोली बेटा मुझे चोदोगे

सभी दोस्तों को इशान का नमस्कार. मैंने पिछले ४ साल से कामुक स्टोरी की मस्त सेक्सी स्टोरीज पढ़ रहा हूँ. अब तो मुझे इसकी आदत हो चुकी है. आज मैं आपको अपनी सेक्सी स्टोरी सुनाता हूँ. कुछ दिनों पहले मेरी मम्मी अचानक बाथरूम में फिसल के गिर गयी. उनकी कमर टूट गयी. जिसवजह से मेरे घर का सारा काम रुक गया. खाना बनाना किसी को आता नही था तो मुझे एक कामवाली की जरुरत महसूस हुई. मैंने एक कामवाली को रख दिया. मेरे मोहल्ले में उसे कांता बाई सब कहते थे. जब उसने पहली बार खाना बनाया तो घर में सबको पसंद आया. धीरे धीरे वो मेरे घर में जम गयी और मेहनत से काम करने लगी. एक दिन कांता हाल में पोछा लगा रही थी.


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वो फर्श पर झुकी हुई थी. उसका पिछवाड़ा पीछे की ओर निकला हुआ था. मेरा फोन हाल में चार्ज हो रहा था. जैसे ही मैं उठाने गया , दोस्तों आचानक मेरी नजर मेरी मस्त कांता बाई पर पड़ गयी. वो झुकी हुई थी. झुककर पोछा लगा रही थी. उसके २ बेहद मस्त मस्त उजले दूध के मुझसे दर्शन हो गये. मेरा तो ये देखकर दिमाग ही घूम गया. मैं मोबाइल पर कुछ न कुछ करने का बहाना करने लगा. और कनखियों से कांता कामवाली के दूध ताड़ रहा था. जब वो मुड़ी तो उसका बहुत बड़ा पीछे की ओर निकला पिछवाड़ा दिखने लगा. मेरा मन ठरकी हो गया. सोचने लगा की कास कामवाली की चूत मिल जाती. मेरी वासना मेरी बेशर्मी को पार कर गयी. मैं जाने क्यों एक टक कांता को घूरने लगा. जैसे अभी उसको खा जाऊंगा. मेरी कामवाली कांता अपनी धुन में थी. वो बालती में पोछा भिगोती, उसे हिलाकर अच्छे से हिलाती, फिर ताकत से दोनों हाथों से निचोड़ती और फिर फर्श पर पोछा मारती. मैं उसे ताड़ ही रहा था की कांता ने मुझे पकड़ लिया. मेरी वासना भरी नजरें उसकी गोल गोल भरी भरी ब्लाउस के अंदर छातियों पर चिपकी थी. जैसे ही कांता ने मुझे उसे घूरते पकड़ लिया तुरंत अपनी साड़ी अपनी छाती पर डाल दी और दूध को ढक लिया. मुझे अपनी वासना और चुदास पर पछतावा हुआ. मैं झेंप गया और हाल ने बाहर निकल आया. पर पूरी शाम और पूरी रात मुझे कांता कामवाली के दूध परेशान कर रहे थे. कितना किस्मत वाला है इसका मर्द. सारा रोज रात में इसकी बुर मारता होगा. उसे तो जन्नत जरुर मिल जाती होगी.

मैंने यही सोच रहा था और रात को मैंने कांता कामवाली को याद करते करते मुठ मार दी. दोस्तों मैं अभी सिर्फ १९ साल का था और लखनऊ के एक इंस्टिट्यूट से होटल मैनेजमेंट का कोर्से कर रहा था. इस लिए अभी तो मेरी शादी होनी नही थी. कैरिअर जो बनाना था. इसलिए दूर दूर तक चूत मिलने का कोई सवाल ही नही था. मैंने कांता को सोच सोचकर कई दिन मुठ मार दी. कांता अब मेरे कमरे में आती तो छातियों को ढककर रखती. क्यूंकि वो जानती थी की मैं उसको गंदी नजरो से देखता हूँ. एक दिन उसके पति से उसका सारे पैसे छीन लिए और शराब पी गया. कांता मेरे पास आकर रोने लगी.

“ईशान बेटा !! जो पैसा कल तुमने दिया था, मेरा बेवड़ा मर्द ने मुझसे छीन लिया और शराब पी गया. अब मैं पूरा महीना क्या खाऊँगी ???’ वो रो रोकर कहने लगी. मैंने उसके जवान कंधे पर हाथ रख दिया.

“रो मत कांता !! मैं तुमको कुछ और पैसे देता हूँ”  मैंने उसका कंधा जोर से दबाया. फिर उसको १००० रूपए और दिए. धीरे धीरे कांता मुझसे सेट गयी. मैंने उसको एक दिन किचेन में पकड़ लिया और उसके गाल को चूम लिया. उस दिन वो बिलकुल माल लग रही थी. मैंने सोच लिया था की आज कांता को चोदना है

“इशान बेटा !! ….ऐसा मत करो. मैं एक शादी शुदा औरत हूँ. मुझे चोदकर मेरा धर्म मत बिगाड़ो” कांता बोली. मैंने उसकी एक नही सुनी. उसको बाहों में भर लिया और उसके होठ पीने लगा. भला हो उसके शराबी मर्द का वरना मुझे उसे पटाने का मौका नही मिलता. मैं कांता के दूध दबाने लगा. वो ‘नही बेटा !!…नही बेटा !!’ करती रही और मैंने उसको जमीन पर ही लिटा लिया. जब तक वो विरोध करती मैंने उसकी साड़ी उपर उठा दी. उसकी लाल रंग की सस्ती वाली चड्ढी निकाल दी. उसकी बुर में लंड डाल दिया और कांता कामवाली को चोदने लगा.

“नही बेटा …..मेरा धर्म मत बिगाड़ो. मैं एक पतिव्रता औरत हूँ” कांता कहने लगी पर मैंने उसकी एक नही सुनी. उसकी दोनों भरी भरी टांगो को उठाकर मैंने उपर कर दिया और उसकी चूत लेने लगा. कुछ देर बाद वो शांत हो गयी और आराम से बिना कीसी गतिरोध के चुदवाने लगी. मैंने कांता कामवाली को अपनी बाहों में कस लिया और आगे पीछे होकर किसी नाव की तरह उसकी बुर में गोते खाने लगी. कामवाली ना जाने क्या मेरे कान में बुदबुदा रही थी. मैंने तो उसकी बुर में डूबने उतराने लगा. मैंने महसूस किया की मेरा रोकेट जैसा लंड कामवाली की बुर में बिलकुल गहराई तक जा रहा था. कांता को चुदने में पूरा मजा मिल रहा था. वो जो सोचती हो सोचती रहे , पर आज मैंने तो उसको चोद लिया. कुछ देर और बीता तो कामवाली कांता कहकहकर चुदवाने लगी. “इशान बेटा !! तुम अच्छी चुदाई करते हो….पेलो बेटा !! मुझे जोर से पेलो !!’ कांता कहने लगी.

मुझको जोश चढ़ गया. मैं जोर जोर से उसे लेने लगा. वो चुदने लगी. मैंने उसके गाल और मत्थे को चूमने लगा जैसे कोई अपनी औरत को प्यार कर करके चोदता है. कांता मजे से चुदवाने लगी. उसकी चूत बहुत गर्म थी. जैसी कोई लोहे की गर्म भट्टी हो. मेरा लम्बा लंड २६ वर्षीय कांता की गर्म चूत को चोद रहा था और उनकी गर्मी में झुलस रहा था.

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“इशान !! बेटा और जोर जोर से मुझे चोदो. मेरा पति तो कभी मुझको लेता ही नही है. वो तो बस शराब पीकर टूल्ल हो जाता है” कांता बोली. कुछ देर बाद मैं उसकी गर्म भट्टी जैसी बुर में बह गया था. उसके बाद मैंने उसको छोड़ दिया और बाथरूम में नहाने चला गया. दोस्तों कुछ दिन बाद मेरी मम्मी हॉस्पिटल से लौट आई. अब जाकर उनकी कमर की हड्डी जुड़ पाई थी. मम्मी के आ जाने के कारण अब मैं खुले आम अपनी कामवाली से प्यार नही जता पाता था. एक दिन रात ९ बजे मुझे कांता की चूत की बड़ी जोर की तलब गयी. मुझसे रहा ना गया. मैं कांता के घर पहुच गया. मुझे देखकर उसके चेहरे का रंग उड़ गया.

“इशान बेटा !! तुम इधर को क्यूँ आये???’ वो परेशान होकर बोली

‘कांता !! मेरी जान….मेरी जानम, मेरा लौड़ा बहुत जादा खड़ा हो रहा था. तुम्हारी चूत की तलब लगी तो मैं तुम्हारे घर चला आया” मैंने कहा

‘अरे बेटा !! मेरा बेवड़ा आदमी अंदर ही है. उसने तुमको देख लिया तो खामखा बवाल कर देगा. अभी तुम यहाँ से जाओ. जब सही समय होगा मैंने तुमको फोन करुँगी और चुदवाउंगी!!’ कांता बोली

‘जान !! मैं तुमको चोदे नही जाऊँगा और तेरे मर्द का इंतजाम है मेरे पास” मैंने कहा और इंग्लिश शराब की एक बड़ी बाटली मैंने कांता को दिखाई. वो मुझे अंदर ले गयी. उसके आदमी के साथ मैंने बैठ के शराब पी. खुद मैंने १ जाम पिया और बाकी उसके आदमी के पेट में खाली कर दी. मुझे वो तरह तरह की दुआएं देता हुआ सो गया. कांता कामवाली का घर बड़ा छोटा था. सिर्फ एक कमरा ही था.

“कांता !! आजा मेरे लौड़े की प्यास बुझा दे” मैंने कहा. उसने अपने को दिवाल के किनारे पर लिटा दिया. इंग्लिश शराब के नशे में वो धुत्त हो चूका था और खर्राटे लेकर सो रहा था. मेरी कामवाली कांता बाई बड़ी होशियार थी. उसने एक रस्सी पर अपनी झीनी आसमानी साड़ी डाल दी और पार्टीशन बना दिया. कपड़े उतारकर किसी छिनाल की तरह लेट गयी

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“आओ इशान बेटा !! अब चोदो मुझे! कोई टेंसन नही है अब” कांता बोली. मैंने उसकी ब्रा और चड्ढी निकालकर उसको साबुत नंगा कर दिया. कुछ देर उसके मस्त गदराये जिस्म से खेलता रहा. फिर बाटली में २ ४ बुँदे शराब की बची थी, मैंने कांता की चूत में डाल दी और जीभ से सारी शराब पी गया. फिर कांता की बुर पीने लगा. कुछ देर में उसके दोनों पैर हवा में किसी देश के झंडे की तरह उठे हुए थे और मैं कांता की इज्जत लूट रहा था. उसको चोद रहा था. हमदोनो का प्यार बड़ी देर तक चला. मैं मजे से उसे लेता रहा. आज भी वही कल वाला स्वाद मिल रहा था. मैं अपनी कामवाली को मजे से चोद रहा था. जैसे ही मैं झड़ने वाला था, पता नही कहा से कांता का मर्द जाग और खांसने लगा. हालाकि उसकी आँखें बंद थी. कांता डर गयी की कहीं उसके मर्द ने उसे मुझसे चुदवाते देख लिया तो आफत मचा देगा.

मैं जल्दी से कांता के उपर एक चादर ओढ़ के लेट गया और मुर्दे की तरह निश्चल हो गया. कुछ देर में उसका मर्द फिर से जोर जोर से खर्राटे लेने लगा. मैंने फिर से अपना अड्डे पर आ गया और कांता को बजाने लगा. कितनी बड़ी और अजीब बात थी. मैंने उसके बेवड़े पति के सामने उसको खा रहा था. एक तरह से देखा जाए तो बड़े साहस वाला काम मै कर रहा था, पर ये एक बड़ी बेवकूफी वाली बात भी थी. अगर उसका बिगडैल झगड़ालू पति अगर जग जाता और हम दोनों को ठुकाई करते पकड़ लेता तो मेरा तो लौड़ा ही वो काट देता और कांता की बुर में चाक़ू मार देता. मैंने कांता को खूब लिया और गर्म गर्म खीर उसकी भट्टी में छोड़ दी. उसके बाद मैं अपने घर चला आया. जब मेरी मम्मी ठीक हो गयी तो उन्होंने कांता कामवाली को हटाने की मांग की. मैंने सोचा की कांता चली गयी तो उसकी बुर भी चली जाएगी.

“अरी मम्मी !! अभी अभी तो तुम्हारी तबियत ठीक हुई है. डॉक्टर से अभी काम करने से मना किया है. इसलिए अभी हमलोगों को कांता को काम पर रखना चाहिए” मैंने बोला.

अब समय समय पर मुझे अपनी कामवाली की चूत मिल जाता करती थी. कभी अपने घर पर, कभी कांता के घर पर. एक दिन कांता बड़ी सज संवर कर आई.

“इशान बेटा !! आज मेरी शादी की सालगिरा है!!’ शाम को तुमको दावत पर आना है” कांता बोली. मैं शाम को उसके लिए एक बहुत ही बढ़िया और महंगी साडी अपनी पॉकेट मनी से खरीद कर ले गया. जैसे ही मेरी चुदक्कड़ कामवाली ने वो कीमती फिरोजी रंग की साड़ी पहनी वो बहुत खुश हो गयी.

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“अरे इशान बेटा…ये तो बहुत सुदर साड़ी है. कितने की मिली??’ वो मेरी आँखों में झांककर पूछने लगी. मैंने भी उसे आँखों ही आँखों में खूब ताड़ लिया.

“पुरे ५००० रूपए की” मैंने जवाब दिया. कांता का पियक्कड़ पति घर में मौजूद था. हम तीनो से साथ में दावत उड़ाई. फिर मैंने अपनी जेब से एक महंगी इंग्लिश शराब की बोतल निकाली. उसे देखते ही कांता के बेवड़े मर्द का मूड बन गया. मैंने खुद हम तीनो से लिए गिलास बनाया. हम तीनो ने फुल शराब पी. शराब पीते ही कांता कामवाली के पति को चढ़ने लगी. मैं कांता के बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया और अपनी माल से छेद छाड़ करने लगा. कुछ ही देर में उसका पियक्कड़ पति बिस्तर पर लुड़क गया. मैंने कांता को लेकर वही खाली पड़े बिस्तर पर लेट गया और कांता को बाहों में भरकर चूमने चाटने लगा. कुछ ही देर में हम दोनों बिना कपड़ों के आ चुके थे. मैं अपनी चुदक्कड़ कामवाली के ओंठ पी रहा था. उसकी सासों की महक मैं ले रहा था. फिर मैं कांता के बड़े भीमकाय साइज़ के ३४ इंच के दूध मुँह में भरके पीने लगा. मुझे मौज आ गयी.

क्या मस्त मस्त सफ़ेद दूध थे उसके. जी कर रहा था की दांत से काट कर निकाल लूँ और सारी जिन्दगी भर मजे से वो दूध पीता रहू. मैं कांता की नर्म नर्म छातियों को कीसी छोटे बच्चे की तरह पी रहा था. उधर दूसरी तरह कांता के पति शराब के नशे में गहरी नींद में सो रहा था. कांता के दूध तो मुझे संसार के सबसे जादा सुंदर और सेक्सी दूध लग रहे थे. मैं हाथ से जोर जोर से उसके नाजुक मम्मे दबा रहा था और मजे से पी रहा था. फिर मैं कांता की सेंसेंशनल चूत पर आ गया. बड़ी सुंदर बुर थी उसकी. कांता का मर्द तो हमेशा नशे में रहता था. इसलिए कभी उसकी बुर मार ही नही पाता था. मैंने कांता का लाल भोसडा पीने लगा. आज जितना भी उसका भोसड़ा फटा था सब मेरी ही देन थी. पिछले कई दिनों ने रोज मैं कांता के भोसड़े में लौड़ा देता था और उसे खाता था. मैंने अपने होठ कांता की बुर पर रख दिए और उसको मजे से पीने लगा.

जीभ से चूत के होठ की पंखुड़ियों को सहलाता था, बड़े लाड़ से चाटता था. घंटो मैं कांता की बुर से खेलता रहा. फिर वो बेचैन होने लगी. कमर, गांड और टाँगे उठाने लगी. “इशान बेटा ….अपनी कामवाली को आज उसकी शादी की सालगिरह की ऐसा चोद की मुझे संसार के सारे सुख मिल जाए” कांता बोली. मैं समझ गया की उसे लंड की जरूरत है. मैंने तुरंत अपना लंड कांता की चूत के दरवाजे पर रखा और अंदर धक्का दिया. उसकी चूत तो मेरे लंड से अच्छी तरह परिचित थी, लंड तुरंत अंदर चला गया. और अपनी माल अपनी कामवाली को लेने लगा. कांता मुझको अपनी पति मान चुकी थी. क्यूंकि जिस तरह वो मुझसे चुदवा रही थी. प्यार से दोनों बाँहों में भरके वो तो कोई पत्नी की कर सकती है. उसकी आँखें  बंद थी. बंद पलकों का सौंदर्य मैं अपनी आँखों से पी रहा था. कांता के सर के बाल के गोल गोल ऐठी लटाएं बार बार उसके खूबसूरत चेहरे पर बार बार गिर जाती थी और मुझे बार बार उन लटाओं हो हाथ से उपर करना पडटा था. चुदती कांता की नाक और मुँह से निकलती गर्म सिसकियाँ मुझे और जादा चुदासा कर रही थी और मैं हौंक हौंक के उसके बड़े से भोसड़े में उनकी दोनों गोल गोल जाँघों के बीच स्तिथ उसकी बुर में धक्के पेल रहा था. अआः उई उई माँ माँ ओह माँ ओ माँ !!’ जैसी आवाजे मेरी कामवाली निकाल रही थी.


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मैं और भी जादा जोश में आ रहा था इन आवाजों को सुनकर, और जोर जोर से कांता की नाजुक चूत को मांज और चोद रहा था. आज मुझे वो अपूर्व सुन्दरी लग रही थी. उसकी शादी की सालगिरह पर मैंने उसको संसार के सबसे जादा बढ़िया तरह से लेना चाहता था. जब चुदते चुदते कांता ने मुझे अपनी बाहों में बड़ी जोर से कस लिया तो मैं जान गया की वो मुझसे पहले झड जाएगी. ये जानकर मुझे ख़ुशी भी मिली. क्यूंकि अगर स्त्री से सम्भोग करते समय अगर स्त्री पहले बह जाए तो ये पुरुष के लिए गर्व वाली बात होती है. मैं कांता को दोनों बाहों में भरके और जोर जोर से हौकने लगा. फिर कुछ देर बाद लंड अंदर बाहर करते करते मैंने अपने लंड पर उसकी योनी से निकलती गर्म गर्म मलाई को महसूस किया. कांता मेरे मोटे लंड पर ही बह गयी. झड़ते झड़ते उनसे मुझे कस लिया. उसे जोर जोर से पेलता हुए मैं १० मिनट बाद उसकी बुर में शहीद हो गया.