दीदी की गांड ऐसी ही मारो

मैं बचपन से ही अपने जीवन में कुछ अलग करने की सोचता रहता था और इसी वजह से मुझे मेरे परिवार के सब लोग कहते थे कि तुम बहुत अलग हो। मुझे अपने जीवन में कुछ अलग ही करना था मैंने जब अपने जीवन की शुरुआत अपनी पहली नौकरी से की तो उस वक्त ही मैंने सोच लिया था कि मुझे कुछ अलग करना है इसलिए मैंने कुछ समय बाद ही नौकरी छोड़ दी थी और नौकरी छोड़ने के बाद मैंने अपना काम शुरू किया लेकिन कुछ समय बाद ही मैं अपना काम नहीं चला पाया परंतु मैंने अपने जीवन में कभी भी हार नहीं मानी थी इसलिए मैंने अपना नया काम खोलने की सोच ली और उस में मेरा साथ मेरे दोस्त कुशाल ने दिया, कुशाल ही मेरे साथ उस वक्त खड़ा था जब सब लोगों ने मेरा साथ छोड़ दिया था, कुशाल ने बहुत मेहनत की है और मेरे साथ उसने काम करके दिन रात एक कर दिया। एक दिन जब मैंने कुशाल को अपने नए प्रोडक्ट के बारे में बताया तो वह बहुत खुश हुआ और जब मैंने उसे एक नया प्रोडक्ट दिखाया तो वह कहने लगा यह प्रोडक्ट तो मार्केट में धूम मचा देगा, मैंने उसे कहा हां हम लोग अब इस पर ही काम करेंगे और हम दोनों ने उस प्रोडक्ट पर काम करवाना शुरू कर दिया, हम दोनों ने उसके लिए रात दिन एक कर दी जब वह प्रोडक्ट बनकर तैयार हो गया तो हम दोनों को पूरा भरोसा था कि वह प्रोडक्ट मार्केट में धूम मचा देगा और इसलिए हम दोनों ने उसे लांच करने की सोची और जल्दी वह समय आ गया जब हमने उस प्रोडक्ट को लांच किया।

उसी दौरान मुझे मेरा बिजनेस पार्टनर कुशाल नंदिता से मिलाता है, जब मैं नंदिता से मिला तो वह मुझे बड़ी ही एक्टिव महिला लगी। जब मुझे कुशाल ने उससे मिलवाया तो कुशाल कहने लगा यह नंदिता है और हम लोग एक दूसरे को 5 वर्षों से जानते हैं, नंदिता की बहन भी उसके साथ आई हुई थी उसका नाम अलंकृता है। जब हम लोग वहां से फ्री हुए तो मैंने नंदिता और अलंकृता को डिनर के लिए ऑफर किया वह लोग शाम को मेरे साथ डिनर पर आ गये, मेरे साथ कुशाल भी था, अब हम लोगों की पर्सनल लाइफ को लेकर बात होने लगी। मैंने उन लोगों को कहा कि मेरी लव मैरिज हुई है और मेरी शादी को 10 वर्ष हो चुके हैं और इन 10 वर्षों में मेरे जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव आये है लेकिन उसके बावजूद भी मैंने कभी हार नहीं मानी, मुझे कुशाल ने बीच में रोका और कहने लगा मुझे अब तुम्हारे बारे में नंदिता और अलंकृता को बताने दो, वह दोनों बड़े ही ध्यान से कुशाल की बात सुनने लगी।

कुशाल कहने लगा रूपेश बहुत ही मेहनती किस्म का व्यक्ति है मैं भी पहले नौकरी ही करता था लेकिन एक दिन रूपेश मुझे मिला और उसने मुझे कहा कि मैं एक कंपनी शुरू करने वाला हूं यदि तुम मेरे साथ पार्टनर बन जाओ तो मुझे बहुत खुशी होगी, मुझे भी रूपेश का वह ऑफर पसंद आया और मैंने रूपेश के साथ मिलकर कंपनी शुरू कर ली, शुरुआत में हम दोनों को काफी नुकसान हुआ लेकिन जैसे जैसे हम लोगों का समय बीतता गया तो हम लोगों को अब तजुर्बा भी होने लगा था और हमारा काम भी अच्छा चलने लगा हम लोग मार्केट में अब तक काफी प्रोडक्ट लॉन्च कर चुके हैं और अब हम लोग अपना नया प्रोडक्ट लॉन्च करने वाले हैं। जब हम लोग आपस में बात कर रहे थे तो होटल के वेटर ने कहा सर क्या आपके लिए खाना लगा दे? मैंने उसे कहा हां क्यों नहीं। वेटर खाना ले आया हम लोग साथ में बैठकर डिनर करने लगे, उस दिन हम लोगों ने साथ में डिनर किया और उसके बाद से अक्सर मैं नंदिता से मिलता रहता लेकिन मुझे नहीं पता था कि दिल ही दिल में अलंकृता मुझसे प्यार करने लगेगी परंतु मैं उसे कभी अपना नहीं सकता था क्योंकि मेरी पहले ही शादी हो चुकी थी और मैं ज्यादातर समय अपने ऑफिस में ही देता था, मुझे नहीं पता था कि अलंकृता मेरे पीछे हाथ धोकर पड़ जाएगी।

मैंने इस बारे में नंदिता से भी बात की और नंदिता से कहा कि तुम उससे इस बारे में बात करना और उसे समझाने की कोशिश करना। नंदिता ने भी उसे समझाने की कोशिश की लेकिन उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था क्योंकि उसकी उम्र कम थी और उसकी शादी नहीं हुई थी इस वजह से शायद उसे मुझ से प्रेम हो गया, मैंने भी नंदिता और अलंकृता को अपने घर पर कई बार इनवाइट किया नंदिता की तो शादी हो चुकी थी लेकिन वह अपने पति के साथ नहीं रहती थी उसके पति और उसके बीच में ज्यादातर झगड़े ही रहते थे इस वजह से वह अलंकृता के साथ रहती थी, उन दोनों के माता पिता का देहांत कुछ वर्षों पहले ही हो चुका था,नंदिता ने ही अलंकृता की सारी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई थी और वही घर का सारा खर्चा चलाती थी। मैं भी जब उन दोनों से मिलता तो मुझे खुशी होती लेकिन मुझे नंदिता को देख कर बहुत दुख होता था क्योंकि उसके पति ने उसके साथ बहुत गलत किया था परन्तु मैंने कभी भी नंदिता से इस बारे में बात नहीं की, मैं जब भी उसे मिलता तो मैं हमेशा उससे खुश होकर मिलता। नंदिता से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी लेकिन अलंकृता की वजह से हम दोनों की दोस्ती में दिक्कत पैदा होने लगी। अलंकृता हमेशा नंदिता को मेरे बारे में कुछ ना कुछ गलत कहती एक बार तो उसने मेरे बारे में नंदिता से इतना गलत कह दिया कि मैं गुस्से में उस दिन उनके घर चला गया। जब मैं उनके घर पर गया तो वहा का नजारा देखकर मैं चौक गया मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि अलंकृता इतनी बोल्ड और बिंदास है उसने बिकनी पहनी हुई थी जिसमें की वह बड़ी सेक्सी लग रही थी।

वैसे भी वह मुझ पर पूरी तरीके से फिदा थी तो इसलिए मुझे उसे सेक्स के लिए अपनी तरफ करने में ज्यादा समय नहीं लगा और कुछ ही क्षणों में वह मेरी बाहों में आ गई। जब वह मेरी बाहों में आई तो मैंने उसके बदन को दबाना शुरू किया उसके गोरे बदन को अपने हाथों से दबाता जाता तो वह बड़ी ही उत्तेजित हो गई, वह मुझे कहने लगे रूपेश मैं तो तुम्हारे लिए कब से तड़प रही हूं तुम्हारी वजह से मैं किसी और के साथ भी सेक्स नहीं कर पाई। उसकी बात से मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया और उसे अपनी बाहों में लेते हुए उसके होठों और उसके स्तनों को मैंने चुसना शुरू किया मैंने जब उसकी पैंटी को उसकी गोरी टांगों से नीचे उतारा तो उसकी चूत से गिला पदार्थ बाहर निकल रहा था। मैंने जब अलंकृता की चूत पर अपनी उंगली को लगाया तो वह बड़े जोश में आ गई और मैंने भी अपने लंड को उसकी चिकनी चूत पर सटाते हुए अंदर की तरफ धकेलने की कोशिश की और जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो उसके मुंह से चिल्लाने की आवाज निकल पड़ी। वह मुझसे लिपटी हुई थी अलंकृता मुझसे इतने कसकर लिपटी थी कि मैं कहीं भी हिल नहीं पा रहा था लेकिन मेरा लंड उसकी योनि के अंदर बाहर होता जाता जिससे की उसकी चूत से लगातार खून का बहाव होने लगा।

वह अपने मुंह से मादक आवाज मे सिसकिंया लेने लगी उसकी आवाज इतनी सेक्सी थी कि मुझे उसे छोड़ने का बिल्कुल मन नहीं कर रहा था और मैं लगातार तेजी से उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को किए जा रहा था उसने अपने पैरों को एकदम चौड़ा कर लिया और मैंने भी उसे बड़ी तेजी से उसे धक्के मारे जैसे ही मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर गिरा तो उसने मुझे कसकर पकड़ लिया। उसके नाखूनों के निशान मेरी कमर पर भी लग गए मैंने भी अपने दांत के निशान उसके स्तनों पर मार दिए लेकिन हमें नहीं पता था कि यह सब नंदिता देख रही है। नंदिता यह सब बड़े मजे से देख रही थी जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि से बाहर निकाला तो नंदिता मेरे मुंह के सामने खड़ी थी यह देखकर मै घबरा गया लेकिन मुझे नहीं पता था कि उसे भी सेक्स की भूख है और वह भी सेक्स करना चाहती है। मैंने अलंकृता की टाइट चूत मार ली थी इसलिए मुझे अब चूत मारने का मन नहीं था नंदिता की बड़ी गांड मेरे सामने थी उसकी गांड मारने की मैंने ठान ली थी। मैने लंड पर  तेल लगाया ताकि मेरा लंड चिकना हो सके। मैंने अपने लंड को उसकी गांड में घुसा दिया उसकी गांड में जैसे ही मेरा लंड घुसा तो उसके मुंह से बड़ी तेज आवाज निकल पडी, मुझे ऐसा लगा जैसे कहीं उसकी गांड मे दर्द ना हो जाए वह अपनी गांड को मुझसे टकराने पर लगी हुई थी। उसकी चूतडो से इतनी तेजी से आवाज मुझे सुनाई दे रही थी मेरे अंदर जोश बढ़ता ही जा रहा था मैं तेजी से उसे धक्के दिए जा रहा था। उसकी चूतडो की गर्मी से मेरे लंड का बुरा हाल हो चुका था मैंने उसकी चूतडो को अपने हाथों से पकड़ लिया और जब मैंने उसे धक्के देना शुरू किया तो वह चिल्लाती जाती।  अलंकृता मुझे कहने लगी आप तेजी से नंदिता दीदी की गांड मारो मुझे देखने में बड़ा अच्छा लग रहा है। अलंकृता अपनी आंखें चौडी करके यह देखती रही भला मैं भी कितनी देर तक झेल पाता जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने भी अपने लंड को बाहर निकाल लिया और दोनों बहनों के मुंह पर वीर्य को गिरा दिया जिससे कि वो दोनों बहुत खुश हो गई और कहने लगी तुम्हारे साथ तो आज सेक्स करने मे मजा ही आ गया। मैंने भी कभी उम्मीद नहीं की थी उन दोनों के साथ में इस प्रकार से संभोग कर पाऊंगा लेकिन मैंने जब से नंदिता और अलंकृता के साथ सेक्स किया तो मुझे बड़ा आनंद मिला। उसके बाद मैंने उन दोनों बहनों को भी अपना लिया और वह दोनो मेरी हर चीज का ख्याल रखती थी उन दोनों को मेरे साथ एक साथ सेक्स करने में कभी कोई आपत्ति नहीं हुई वह दोनों बड़ी बिंदास और बोल्ड किस्म की महिला है मेरा लंड उनको देखकर ही तन कर खड़ा हो जाता है।


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