चाची की चूत में मेरा लंड

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम अनुराग है | मेरी उम्र 21 साल है | मेरा लंड 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है | में आज आप सभी को अपनी एक मजेदार सेक्सी कहानी सुनाने जा रहा हूँ | यह मेरे और मेरी चाची के बीच की सेक्स की कहानी है | मैं हैदराबाद में रहकर अपनी पढ़ाई करता हूँ और में वहां पर अपने परिवार वालों के साथ रहता हूँ | में एक बार अपनी चाची को उनके मायके छोड़ने उनके साथ जा रहा था | में और वो बस में एक ही स्लीपर में थे और उस समय ठंड के दिन थे | इसलिए खिड़कियाँ भी बंद थी और वो रात का सफ़र था और ठंड अधिक होने के कारण मैं तो अपने पैरों को मोड़कर लेटा हुआ था | बस तेजी से चल रही थी शायद रोड खराब थी जिसके कारण बस में झटका लगा और मेरा हाथ एक बार उनके बूब्स के पास चला गया | लेकिन वो मुझसे कुछ भी नहीं बोली और मुझे भी उनके बूब्स को दबाकर बहुत मज़ा आ रहा था और थोड़ी देर के बाद जब बस बिना उछलकूद किए चल रही थी | तब में धीरे से उनके बूब्स से सट गया और अपने हाथ उनपर लगाए | पहले एक ही हाथ लगाया | लेकिन जब मुझसे सहा नहीं गया तो दूसरा हाथ भी लगा दिया और फिर उसी समय बस ने एक ज़ोर का झटका खाया और मैंने उनके बूब्स को ज़ोर से दबा दिया | तो उन्होंने एकदम झटके से मेरा हाथ हटा दिया और उन्हे लग रहा था कि में गहरी नींद में सोया हुआ था | लेकिन यह मेरा प्लान था में सोने का सिर्फ नाटक कर रहा था |

फिर उस समय मैंने अपनी चादर को धीरे से अपने दोनों पैरों में बिल्कुल लपेट लिया और अपने हाथ पैर को जोड़कर सो गया | उन्हे लगा कि मुझे ठंड लग रही है और इसलिए उन्होंने मुझे अपनी चादर में घुसा लिया | फिर क्या था सोने पर सुहागा और फिर जैसे ही वो गहरी नींद में सो गई तो में उनके पैर को अपने पैरों से मसाज देने लगा और अब मेरे हाथ उनके  मेन पार्ट पर लग गया | मतलब कि चाची की चूत पर | फिर मैं उनसे धीरे-धीरे सट गया वो अपनी गांड मेरे लंड की तरफ करके सो गई | मेरा लंड तो चूत का प्यासा था वो तुरंत उठकर खड़ा हो गया और अब में उसे धीरे -धीरे उनकी गांड पर रगड़ने लगा | तभी मुझे थोरी देर में अहसास हुआ कि वो जागी हुई है और मेरे सब काम को एंजाय कर रही है | फिर मैंने उनके बूब्स को अब ज़ोर से दबा दिया तो उन्होंने मेरे हाथों को दूर हटाकर चादर से बाहर निकाल दिया | लेकिन में अब उसे नहीं छोड़ना चाहता था | मैंने भी वो चादर फेंक दी और फिर से जैसे ही बस आगे की तरफ हिली तो मैंने उनके बूब्स पर एक बार फिर से हमला बोल दिया और इस बार मैंने सोच रखा था कि मुझे उनके निप्पल को सहलाना है और फिर मैंने ऐसा ही किया | मेरे ऐसा करने से वो पूरी तरह तड़प उठी और नींद में ही उन्होंने अपने पैर को फैला दिया | मुझे अब इससे अच्छा मौका कब मिलता?

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अब वो धीरे धीरे जोश में आ रही थी और अब उनकी चूत भी गीली हो रही थी | फिर मैंने इस बात का फ़ायदा उठाया और मैंने पहले तो अपने पैर की उंगलियों को चूत के बीच सलवार के ऊपर से ही डाला और फिर पानी पीने के बहाने से उठा और उसकी सलवार के नाड़े को थोड़ा ढीला कर दिया और अब दोनों कामुक जिस्म उस एक छोटी सी चादर के अंदर हो गये और मेरा लंड भी अब अंडरवियर के अंदर नहीं रहने वाला था इसलिए मैंने उसे अब बिल्कुल आज़ाद कर दिया और सीधा उनके जिस्म पर सटाकर हिलाने लगा और में थोड़ी ही देर में झड़ गया | मैंने अपना सारा माल उसके स्वेटर और शमीज के ऊपर निकाल दिया | फिर में उसे ज़ोर से अपनी बाहों में लेकर नीचे से पूरा नंगी हालत में ही सो गया, लेकिन जब में सुबह जब उठा तो मैंने देखा कि में पेंट पहने हुए था और सब कुछ साफ है और हम उतरे तो वहां से सीधे एक ऑटो पकड़कर अपने घर पर पहुंचे मतलब कि चाची के मायके पहुच गए | वहां पर मेरी खूब खातिरदारी हुई  | घर पहुंचने के बाद में बाहर जाकर एक रेज़र लाया | क्योंकि मेरे लंड पर एक बहुत बड़ा जंगल उग गया था और में उसे लेकर बाथरूम में नहाने चला गया | वहां पर में और चाची एक ही रूम में ठहरे हुए थे | लेकिन अब मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई मुझे बाथरूम में बाहर दरवाजे से देख रहा है और कुछ देर के बाद मुझे ऐसा लगा कि वो शायद चाची ही है | लेकिन फिर भी मैंने अपने लंड की सफाई को लगातार जारी रखा और लंड की पूरी तरह से साफ सफाई होने के बाद मैंने सरसों का तेल लगाकर अपने लंड की मालिश कि और उसको उसके  आकार में ले आया और तनकर खड़ा कर दिया | यह सब कुछ मेरी चाची छुपकर देख रही थी और मेरे लंड का साईज़ देखकर मानो वो अब मेरे साथ सेक्स करने के लिए तड़प गई और अब वो खुद ही अपनी चूत में उंगली करने लगी | इसका आभास मुझे तब हुआ जब मैंने पानी को बंद कर दिया और उस आवाज़ को ध्यान से सुनने लगा | धीरे धीरे वो आवाज़ और भी बड़ गयी और अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था |

तभी अचानक से मैंने बाथरूम का दरवाजा एक ही झटके से पूरा खोला दिया | उस समय में पूरा नंगा था और फिर में बाहर खड़ी हुई चाची को देखकर एकदम हैरान रह गया | क्योंकि वो अपने एक हाथ से अपने बूब्स को दबा रही थी और दूसरे हाथ से अपनी चूत में उंगली कर रही थी | मुझे देखकर वो कहने लगी कि बस अब मुझे और मत तड़पाओ अंदर तो बहुत तेज़ी दिखा रहा है फिर यहाँ पर इतना चुप क्यों हो | अब मेरी चूत की प्यास बुझा दो ना | तेरे लंड को देखकर मैं बस में ही तुझसे चुदवाने के सपने देखने लगी थी | फिर उनके मुहं से यह बात सुनकर मैंने उनको गोद में उठा लिया और ले जाकर बेड पर लिटा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा और दोस्तों में उसकी चूत का स्वाद आज भी नहीं भूल सकता हूँ | वो फिर मेरे लिए कुछ तेल जैसा लेकर आई जो कि शायद अंकल काम में लिया करते थे | जिससे में बहुत देर तक नहीं झड़ने वाला था | उन्होंने उसे मेरे लंड पर लगाकर मालिश की और अब में उनकी चूत को चाटने लगा | फिर क्या था वो थोड़ी ही देर में झड़ गई तो मैंने उनसे पूछा कि क्यों औरत तो इतनी जल्दी नहीं झड़ती है | तब उन्होंने कहा कि अगर तेरे जैसा कोई चूत चाटने वाला मिले तो हम क्या कर सकती है |

फिर मैंने उनकी चूत पर लंड को रखकर एक ही धक्के में पूरा का पूरा लंड डालकर उन्हे ज़ोर-ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा और वो मौज करने लगी और मुझसे कहने लगी कि हाँ और ज़ोर से, में आज तुम्हारे लंड आह्ह्हह्ह को अपने अंदर लेकर बहुत खुश हूँ | हाँ आईईईईईइ और ज़ोर से चोदो मुझे उह्ह्हह्ह जोर से  और थोड़ा और अंदर डालो | फिर में भी बहुत जोश में आकर जोरदार धक्के दे देकर उनकी चूत की चुदाई किए जा रहा था और फिर करीब आघे घंटे की जबरदस्त चुदाई के बाद अब में झड़ने वाला था | फिर मैंने उनसे कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ अपना वीर्य कहाँ पर निकालूं | तो उन्होंने झट से कहा कि में तुम्हारा वीर्य एक बार चखना चाहती हूँ और फिर मैंने लंड को चूत से बाहर निकालकर उनके मुहं में डाल दिया और अब वो मेरे लंड को लोलीपॉप की तरह चूसने लगी | उसने मेरे लंड को बहुत देर तक मज़े लेकर चूसा और जब में झड़ा तो वो मेरा सारा वीर्य भी पी गयी और बोली कि आख़िरकार तूने आज मेरी प्यास बुझा दी | मैं  कितने दिनों से इस दिन के लिए तरस रही थी | तुमने मुझे आज चोदकर मुझे बहुत मज़ा दिया और मुझे खुश कर दिया | में तुम्हारी चुदाई से बहुत खुश हूँ | आज से तुम मुझे कभी भी चोद सकते हो क्योंकि आज से मैं तुम्हारी हूँ | मैंने अपना लंड उनको फिर से चुसाया मेरा लंड खड़ा हो गया | फिर मैंने उनको घोड़ी बनाया और उनकी गांड सहलाने लगा | उन्होंने मुझसे कहा अनुराग मैं तुझे मना तो नहीं करूंगी पर आज तक मेरी गांड तेरे चाचा ने भ नहीं मारी है मुझे डर लग रहा है | मैंने कहा डरो नहीं मेरी जान मैं बहुत आराम से करूंगा मैंने अपने लंड पे क्रीम लगायी और उनकी गांड पर सहलाने लगा मैंने थोडा जोर लगाया पर उनकी गांड बहुत टाइट थी | मेरा लंड अन्दर नहीं जा रहा था | मैंने जोर से अपना आधा लंड उनकी गांड में डाल दिया | वो चीख पड़ी कहने लगी प्लीज इसे बहार निकाल लो बहुत दर्द हो रहा है | पर मैं कहा रुकने वाला था मैंने एक झटका और लगाया मेरे पूरा लंड उनकी गांड में घुस गया | उनकी आँखों में आंसू आ गए थे | मैं उनको किस करते हुए धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा कुछ देर बाद उन्हें भी मज़ा आने लगा | वो भी अपनी गांड को चला के मेरा साथ दे रही थी | थोड़ी देर बाद मैं फिर झड गया | हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लेते रहे फिर हमने अपने-अपने कपडे पहन लिए | उसके बाद मैंने चाची की कई बार चुदाई की |