पड़ोसन भाभी की 38 नंबर वाली गांड

मेरा नाम गोविंद है मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूं। मेरा अपना खुद का छोटा सा कारोबार है और उससे ही मेरे घर की आजीविका चलती है। मेरी शादी को 3 वर्ष हो चुके हैं। मेरे माता-पिता भी मेरे साथ ही रहते हैं। हम लोग जिस घर में रहते हैं वह घर अब पुराना होने लगा है। मैंने सोचा कि उसे बेच कर नया घर ले लिया जाए। हम लोगों को उस घर में रहते हुए काफी वर्ष हो चुके हैं। मैंने इस बारे में अपने पिता जी से भी बात की तो मेरे पिताजी कहने लगे कि बेटा तुम्हें जो उचित लगता है तुम वह देख लो। अब हमारा जीवन तो कट चुका है तुम्हें ही अब आगे
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अपना जीवन सवारना है। मैंने उन्हें कहा ठीक है पिताजी मैं देख लेता हूं कि इस घर का हम लोग क्या कर सकते हैं। मैंने अपने एक दोस्त से बात की। वह प्रॉपर्टी का ही काम करता है। मैंने उसको कहा कि मैं यह घर बेचना चाहता हूं। क्या मुझे इसके अच्छे दाम मिल जाएंगे? वह कहने लगा कि तुम्हें इस घर के अच्छे दाम मिलना तो मुश्किल है लेकिन तुम इसमें थोड़ा काम करवा कर इसे बेचो तो हो सकता है तुम्हें फिर इसके अच्छे दाम मिल जाए।

मैंने उससे कहा कि मुझे इस घर को बेचकर दूसरी जगह पर कोई अच्छी प्रॉपर्टी खरीदनी है। वह कहने लगा मेरे पास अभी एक अच्छी प्रॉपर्टी है। तुम्हें सही लगे तो तुम मेरे साथ चलो। मैं तुम्हें वहां दिखा देता हूं। वह मुझे अपने साथ लेकर गया और उसने मुझे जहां पर प्रॉपर्टी दिखाई वह लोकेशन मुझे बहुत पसंद आई। मैंने उसे कहा कि तुम जल्दी से मेरा घर बिकवा कर मेरे लिए यहां बुक कर दो। वह कहने लगा ठीक है मैं कोशिश करूंगा कि जितना जल्दी हो सके लेकिन तुम एक काम करो तुम मुझे बुकिंग अमाउंट दे दो ताकि वह घर तुम्हारे नाम पर बुक हो सके और उसके बाद चाहे इस घर को बेचने में थोड़ा वक्त भी लग जाएगा तो कुछ समस्या की बात नहीं होगी। मैंने कहा ठीक है कल तुम घर पर आ जाना मैं तुम्हें घर पर ही चेक दे देता हूं। यह कहते हुए मैं वहां से चला गया और मैंने अपने पिताजी से कहा कि मैंने एक जगह पर अच्छी प्रॉपर्टी देख ली है हम लोग वहीं पर जाकर रहेंगे। पापा कहने लगे ठीक है बेटा। अगले दिन मेरा दोस्त मेरे घर पर आ गया। वह जब मेरे घर पर आया तो मैंने उसे कहा कि कितने का चेक बनाना है? उसने मुझे अमाउंट बताया और उसके बाद मैंने उसे चेक पकड़ा दिया।

वह कुछ देर तक हमारे घर पर रुका लेकिन उसे भी कुछ काम था इसलिए वह चला गया। मैंने भी अपने घर की मरम्मत का काम शुरू करवा दिया था और अब काफी हद तक मैंने काम करवा लिया था। उसके बाद मैं अपने दोस्त के पास गया और उसे कहा कि अब मेरे घर का काम पूरा हो चुका है। वह कहने लगा मेरे पास कुछ लोग आए थे मैं उन्हें तुम्हारा घर दिखा देता हूं। उसने मेरा घर उन्हें दिखाया तो एक व्यक्ति से मेरी डील फाइनल हो गई और उन्होंने मुझे उस घर के अच्छे पैसे दे दिए। मैंने वह पैसा अपने दोस्त को देते हुए कहा कि हम लोग वहां शिफ्ट होना चाहते हैं। हम लोग अब नए घर में शिफ्ट हो गये थे। जब मैं वहां पर शिफ्ट हुआ तो वहां शुरुआत में मुझे थोड़ा दिक्कत हो रही थी क्योंकि वहां से मार्केट थोड़ा दूर था लेकिन धीरे-धीरे हम लोग एडजेस्ट होने लगे थे। हम लोगों को वहां पर रहते हुए करीबन दो महीने हो चुके थे और दो महीने में हमारी अब थोड़ी बहुत लोगों से जान पहचान होने लगी थी। मेरी पत्नी की भी अब पड़ोस में जान पहचान होने लगी थी इसलिए वह कभी उनके साथ बैठने चली जाती। हमारे पड़ोस में ही पटेल भाई रहते हैं। उनकी पत्नी को देखकर मुझे हमेशा ऐसा लगता है कि वह जैसे हमेशा गुस्से में ही रहती हो। एक दिन मैं अपने काम से लौट रहा था तो मैंने देखा कि पटेल भाई की पत्नी किसी व्यक्ति के साथ घूम रही हैं और वह उससे बड़े मुस्कुरा कर बात कर रही थी। मैं जब अपने घर पहुंचा तो मैंने अपने सिक्योरिटी गार्ड से पूछा कि आशा भाभी का व्यवहार कैसा है? वह कहने लगा कि हमें तो भैया सही लगा। मैंने उस सिक्योरिटी गार्ड को कहा कि क्या उनका किसी और के साथ भी चक्कर चल रहा है? वह मुझे कहने लगा यह तो मैं आपको नहीं बता सकता। मैंने उसे अपनी जेब से 50 रुपये निकाल कर दिये तो उसने मेरे सामने सब कुछ कह दिया। वह कहने लगा हां उनका यहीं पास के एक व्यक्ति से चक्कर चल रहा है। मैंने उन्हें अक्सर यहां आते-जाते देखा है। जब उसने मुझसे यह बात कही तो मुझे भी उनके अफेयर को लेकर दिलचस्पी बड़ने लगी थी। पटेल भाई से तो हमारे घरेलू संबंध होने लगे थे और उनकी पत्नी भी मेरी पत्नी से मिलने आ जाती थी।

एक दिन मैं आशा जी के साथ बैठा हुआ था उस दिन मैंने उन्हें कहा कि आशा भाभी आप का लगता है किसी और के साथ चक्कर चल रहा है। उन्होंने उस दिन कुछ नहीं कहा। उसके बाद तो वह मुझसे हमेशा दूरी बनाने लगी। वह मेरे आस-पास भी नहीं आ रहा थी। जब भी वह मुझे दूर से देखती तो वह वहीं से रफूचक्कर हो जाती और अपना रास्ता ही बदल देती थी। मैं काफी दिनों से सोच रहा था कि उनसे बात करूं लेकिन उनसे मेरी बात भी नहीं हो पा रही थी और मैं भी अपने काम में इतना उलझा हुआ था कि मुझे भी वक्त नहीं मिल पा रहा था। एक दिन वह मेरे घर पर आ गई। उस दिन घर पर कोई नहीं था। जब वह घर पर आई तो आशा भाभी मुझसे पूछने लगी क्या आज घर पर कोई नहीं है। मैंने उन्हें कहा मैं तो घर पर हूं आप कहिए आपको क्या काम है। वह जैसे ही जाने वाली थी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और अपनी और खींचा। मैंने उन्हें कहा आप तो मुझे देखकर अपना रास्ता ही बदल लेती है। वह कहने लगी नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैंने उन्हें अपनी बाहों में ले लिया और उनक स्तनो को दबाते हुए मजे ले रहा था। मैंने अपने हाथों को उनकी बड़ी गांड पर रख दिया और दबाना शुरू किया तो वह भी मूड में आ गई।

मैंने उनके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। जब मै उनके होठों का रसपान कर रहा था तो मेरा लंड एकदम से तन कर खड़ा हो गया और वह उनकी योनि में जाने के लिए बेताब हो गया। मैंने अपने लंड को जैसे ही बाहर निकाला तो उन्होंने अपने कोमल हाथों से मेरे लंड को पकड़ लिया और हिलाते हुए अपने मुंह में ले लिया। वह मेरे लंड का रसपान बड़े अच्छे से कर रही थी वह मुझे कहने लगी लगता है आपका लंड तो बड़ा मोटा है आज मुझे अपनी चूत में लेने में बहुत मजा आएगा। मैंने उन्हें कहा आप औरो को अपने हुस्न का जाम पिला रही हैं कभी हमें भी अपने हुस्न का जाम पिला दीजिए। मैंने भी उनके कपड़े खोलने शुरू कर दिए। जब मैंने उनके कपड़े खोले तो मेरी नजर से उनकी गांड पर पड़ी। मैंने जब उनकी बड़ी गांड देखी तो मैंने उनकी गांड को चाटना शुरू कर दिया। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैंने काफी देर तक उनकी गांड को चाटा। जब मेरा लंड उनकी गांड में जाने को उतावला हो गया तो मैंने भी उन्हें घोड़ी बना दिया और उनकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड उनकी योनि के अंदर प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी आपने तो मेरी चूत फाड़ दी। मैंने भी बड़ी तेज गति से उन्हें झटके देना शुरू किया और कहा क्या आपकी चूत और कोई नहीं फाड़ता। वह कहने लगी आपके जितना मोटा लंड तो किसी का नहीं है आपका लंड ले कर तो मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कोई डंडा मेरी योनि में जा रहा हो। मैंने उन्हें 5 मिनट तक चोदा। जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैंने अपने लंड को हिलाना शुरू किया। जब मेरा लंड एकदम से तन कर खड़ा हो गया तो मैंने अपने लंड को उनकी गांड से सटा दिया। जैसे ही मैने उनकी गांड के अंदर अपने लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी आप ने मेरी गांड फाड़ कर रख दी। मैंने उन्हें कहा भाभी मुझे तो बहुत मजा आ रहा है आपकी गांड मारने में मैंने उनकी 38 नंबर की बडी चूतड़ों को अपने हाथ से पकड़ा

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हुआ था और बडी तेज गति से मैं उन्हें धक्के दे रहा था। जैसे ही मेरा लंड उनकी गांड के अंदर जाता तो उनके मुंह से उतनी ही तेज चिख निकल जाती। वह मुझे कहती आपने तो मेरी गांड फांडकर रख दी मै ज्यादा देर तक उनकी गांड नही मार पाया। जब मेरा वीर्य गिरा तो मुझे बहुत शांति मिली।


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