मुझे नींद नहीं आ रही

मैं हमेशा ही अपने ऑफिस से आते वक्त चाट जरूर खाया करता था और जब भी मुझे रमेश चाट वाला दिखता तो वह मुझसे कहता की भैया बताओ आज आपके लिए क्या लगाना है, उसके और मेरे बीच बहुत अच्छी जान पहचान हो चुकी थी इसलिए वह हमेशा ही मुझसे कहता कि भैया मैं आज आपके लिए बढ़िया सी चाट लगा देता हूं, मैं उसे कहता आज तुम मुझे बढ़िया सी चाट खिला दो। कभी कबार मैं गोलगप्पे भी खा लिया करता, मेरा हमेशा का ही आना-जाना उस रास्ते से था तो इसी वजह से कई बार मैं रमेश को पैसे भी नहीं देता तो वह कहता कोई बात नहीं आप कल दे देना।

एक दिन मैं अपने ऑफिस से आधा घंटा पहले आ गया और मैं उस वक्त रमेश की दुकान में जल्दी आ गया, मुझे उस दिन बड़ी तेज भूख भी लगी हुई थी मैंने रमेश से कहा कि तुम मेरे लिए टिक्की लगा दो, उसने मेरे लिए टिक्की लगा दिया और मैंने वह खाई तो उसके बाद मैंने पानी पुरी खाई, जब मैं रमेश के ठेले के किनारे पर गया तो वहां पर एक लड़की गोलगप्पे खा रही थी तभी मेरे हाथ से प्लेट नीचे गिर पड़ी मेरे हाथ से जब प्लेट नीचे गिरी तो वह प्लेट उस लड़की के पैर पर जाकर गिरी और उसके ऊपर पानी गिर पड़ा, वह मेरी तरफ बड़े गुस्से में देखने लगी मैंने उसे कहा कि मैडम सॉरी। उसके बाद उसका गुस्सा थोड़ा शांत हुआ और उसकी बड़ी बड़ी आंखें देख कर तो मैं वैसे ही डर चुका था लेकिन उसने मुझे माफ कर दिया था मैंने उसे कहा कि गलती से मेरे हाथ से प्लेट छूट गई, वह कहने लगी कोई बात नहीं। मैंने रमेश से कहकर उस लड़की को अपनी तरफ से पानी पूरी खिला दी और वह उस दिन वहां से चली गई, मैं भी उस दिन अपने घर चला गया, हमेशा की तरह ही मैं जब ऑफिस से आता तो रमेश के ठेले पर जरूर पानी पुरी या फिर कुछ और जरूर खाता, कुछ दिनों बाद मुझे वही लड़की दोबारा से रमेश के ठेले पर मिली और उस दिन उससे बात कर के मुझे बड़ा अच्छा सा लगा मैंने तो कभी उम्मीद भी नहीं की थी कि उससे मैं बात कर भी पाऊंगा लेकिन जब उससे मेरी बात हो गई तो मेरे अंदर हौसला आ गया और मैं उससे बात करता रहा, मैंने उससे काफी देर तक बात की मैंने लगभग उससे आधे घंटे तक बात की, मैंने उससे पूछा तुम्हारा घर कहां है तो वह कहने लगी कि मेरा घर अगली ही गली में है और मैं एक स्कूल में पार्ट टाइम नौकरी करती हूं।

मैंने उससे पूछा कि क्या हम लोग इसके बाद दोबारा कभी मिलेंगे? वह कहने लगी कि हां क्यों नहीं मुझे तुमसे बात कर के अच्छा लगा। जब वह जाने वाली थी तो मैंने उससे पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है, वह कहने लगी कि इतनी देर से हम लोग एक दूसरे से बात कर रहे हैं लेकिन तुमने तो मेरा नाम ही नहीं पूछा, वह कहने लगी मेरा नाम निधि है, मैंने भी उसे अपना नाम बताया और उसके बाद हम लोग वहां से चले गए, मैं उससे हर रोज रमेश के ठेले पर मिल रहा था वह भी हर रोज मेरी तरह वहां पर आती। मैंने एक दिन उससे पूछ लिया निधि क्या तुम्हें पानी पुरी इतनी पसंद है, वह कहने लगी हां मैं तो इसकी बहुत ज्यादा शौकीन हूं, मैंने निधि से कहा मैं भी बहुत ज्यादा शौकीन हूं इसलिए मैं रमेश के पास काफी समय से आता हूं, वह कहने लगी चलो यह तो अच्छी बात है कि हम दोनों में एक जैसी खूबियां हैं। उसने मुझसे पूछा कि तुम्हें और क्या अच्छा लगता है, मैंने उसे कहा मुझे तो बहुत कुछ चीजें पसंद है, वह कहने लगी चलो तुम मुझे बताओ तो सही कि तुम्हें क्या पसंद है, मैंने उसे कहा मुझे तो खाना बनाने का बड़ा ही अच्छा शौक है और मुझे नई नई चीजे घर में बनाकर खाने में बड़ा अच्छा लगता है लेकिन मुझे समय नहीं मिल पाता। निधि मुझसे पूछने लगी कि क्या तुम वाकई में खाना बनाना पसंद करते हो, मैंने निधि से कहा हां मैं खाना बनाना बहुत पसंद करता हूं और मुझे इसका बहुत अच्छा शौक है, मुझे जब भी समय मिलता है तो मैं घर पर अपने परिवार वालों के लिए खुद ही खाना बनाता हूं। वह मेरी बात से बड़ी खुश थी और कहने लगी लगता है अब तुम्हारे हाथों का खाना खाना ही पड़ेगा, मैंने निधि से कहा क्यों नहीं मैं तुम्हें सुरूर खाना खिलाऊंगा। निधि बहुत ज्यादा खुश थी और उस दिन भी हम लोगों ने काफी समय साथ में बिताया अब तो जैसे हम दोनों को एक दूसरे के साथ में समय बिताना अच्छा लगने लगा था और जिस दिन वह मुझसे नहीं मिलती उस दिन मुझे ऐसा लगता कि जैसे मेरे जीवन में कुछ चीज अधूरी रह गई हो और इसी वजह से हम दोनों की नजदीकियां बढ़ती जा रही थी, मुझे भी निधि का साथ पाकर बहुत अच्छा लग रहा था।

मैंने एक दिन हिम्मत करते हुए निधि की पर्सनल लाइफ के बारे में पूछ लिया मैंने उसे पूछा कि क्या तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है, वह कहने लगी नहीं मैं तो सिंगल हूं मेरा कोई भी बॉयफ्रेंड नहीं है, मैंने निधि से कहा तुम तो बहुत ज्यादा सुंदर हो और तुम्हारी सुंदरता मुझे बहुत अच्छी लगी, निधि कहने लगी हां मैं दिखने में सुंदर जरूर हूं लेकिन मैं किसी से भी दोस्ती बड़ी ही सोच समझ कर करती हूं तुम मुझे बहुत अच्छे लगे इसलिए मैंने तुमसे बात की नहीं तो मैं शायद तुमसे भी कभी बात नहीं करती, मैं इन चीजों को बहुत ही ज्यादा सोचती हूं। निधि और मेरे बीच में दोस्ती बहुत ज्यादा गहरी हो चुकी थी और वह भी मेरे बारे में जानना चाहती थी मैंने निधि को कहा कि मेरे जीवन में ऐसा कुछ खास नहीं है मैं सिर्फ अपने जीवन में अपनी जिंदगी को बहुत इंजॉय करता हूं और मैं ज्यादातर समय अकेला रहना ही पसंद करता हूं मुझे किसी का साथ अच्छा नहीं लगता लेकिन जब से मेरी तुमसे मुलाकात हुई है तब से मुझे तुम्हारा साथ अच्छा लगने लगा है और जिस दिन तुम मुझे नहीं दिखती उस दिन मुझे कुछ अजीब ही महसूस होता है, निधि कहने लगी हां मुझे पता है कि तुम मेरे बारे में क्या सोचते हो।

मैंने निधि से कहा मैं जब भी तुम्हें देखता हूं तो मुझे ऐसा लगता है कि जैसे तुम किसी टेंशन में हो, वह कहने लगी नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है, मैंने निधि से कहा तुम्हारे अंदर जो एक डर है मैं उसके बारे में जानना चाहता हूं, वह कहने लगी मैं तुम्हें अब क्या बताऊं मैं अपने पिताजी से बहुत ज्यादा डरती हूं उन्होंने मुझे कभी भी किसी भी चीज के लिए पूरी आजादी नहीं दी और वह मुझ पर बहुत रोक लगाते हैं इस वजह से मुझे उनसे कुछ भी कहने में बहुत बुरा लगता है और मुझे लगता है कि कहीं वह मुझे डांट ना दे इसलिए मैं उनसे ज्यादा बात नहीं करती, मैंने निधि से कहा लेकिन तुम्हें अब अपने जीवन के फैसले खुद लेने चाहिए, वह कहने लगी मैं अपने जीवन के फैसले तो खुद ही लेती हूं लेकिन मुझे कई बार ऐसा लगता है कि मेरे पिताजी का भी शायद मेरे जीवन पर उतना ही अधिकार है जितना मेरा। मैंने उसे समझाया और कहा देखो तुम्हें अब अपनी सोच को बदलना होगा और मैंने उसके अंदर जीने की एक अलग ही चाह पैदा कर दी अब वह अपने बारे में भी सोचने लगी और दिन-ब-दिन उसके अंदर कुछ अलग ही बात दिखाई देती, मुझे जब भी निधि मिलती तो अब उसके चेहरे पर पहले से ज्यादा मुस्कान होती है और वह पहले से ज्यादा खुश नजर आती है। मैंने एक दिन निधि से कहा क्या हम लोग कहीं साथ में घूमने के लिए जा सकते हैं, निधि कहने लगी क्यों नहीं। हम लोग उस दिन साथ में घूमने के लिए गए और मुझे उस दिन निधि के साथ जा कर बहुत अच्छा लगा।

निधि को मुझ पर पूरा भरोसा हो चुका था हम दोनों के बीच में एक अच्छा रिलेशन भी बन चुका था मुझे नहीं पता कि उसका नाम क्या था लेकिन निधि और मेरे बिना नहीं रह सकती थी। एक दिन शायद उसके मम्मी पापा कहीं बाहर गए हुए थे निधि ने मुझे कहा कि क्या आज तुम मेरे घर पर आ सकते हो। मैंने उसे कहा क्यों नहीं मैं उस दिन उसके घर पर चला गया जब मै उसके घर पर गया तो मैंने देखा उसके घर पर कोई नहीं था। हम दोनों ने साथ में बैठकर मूवी देखी हम दोनों ने काफी अच्छा समय बिताया। मैंने निधी से कहा मैं अब चलता हूं वह कहने लगी नहीं आज तुम मेरे पास ही रुक जाओ। मैंने उसे कहा यह संभव नहीं हो पाएगा लेकिन जब मैंने उसकी तरफ देखा तो मैंने सोचा कि आज निधि के साथ रुक जाता हूं रात के वक्त हम दोनों अलग-अलग रूम में लेटे हुए थे लेकिन मुझे नींद ही नहीं आ रही थी और बहुत बेचैनी हो रही थी। मैं निधी के रूम में गया तो वह जागी हुई थी मैंने उसे कहा मुझे नींद नहीं आ रही मैं उसके बगल में जाकर बैठ गया।

निधि मेरी बाहों में सो चुकी थी मैं भी उसे चिपक कर लेटा हुआ था जब उसकी गांड पर मेरा हाथ पडा तो मेरे अंदर उत्तेजना बढ़ने लगी। मैंने उसके सलवार के नाड़े को खोलते हुए नीचे कर दिया उसे भी शायद पता ही नहीं चला। जब मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगडना शुरू किया तो वह जाग गई लेकिन अब उसे मजा आने लगा था। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अंदर प्रवेश हुआ तो उसकी चूत से खून बाहर निकलने लगा उसे बहुत दर्द होने लगा था। वह अब जाग चुकी थी वह अपनी चूतडो को मुझसे मिलाने लगी थी मैं भी उसके ऊपर लेट चुका था और वह मेरे नीचे लेटी हुई थी। उसकी चूत में दर्द होने लगा था वह मुझे कहने लगी संजय मुझे बहुत ज्यादा तकलीफ हो रही है तुम जल्दी से अपने माल को मेरे ऊपर गिरा दो। मैंने तेजी से उसे धक्के देने शुरू कर दिए थे म तेजी से निधि को चोद रहा था उसके मुंह से बड़ी तेज आवाज निकलने लगी थी। उसके बदन को मैंने पूरे तरीके से अपने शरीर के नीचे दबा दिया जब मेरा वीर्य निधि की योनि में गिरा तो वह मुझसे लिपट कर लेट गई और ना जाने कब हम दोनों को नींद आ गई हमें पता ही नहीं चला। सुबह जब मेरी आंख खुली तो हम दोनों नग्न अवस्था में लेटे हुए थे मैंने निधी से कहा अब मैं चलता हूं मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है मैं अपने ऑफिस के लिए निकल गया।


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