दादू आपका लंड तो लंबा है

मैंने अपने जीवन में बहुत सारी कठिनाइयां देखी मैंने काफी साल अपने परिवार को दिए, मेरा संघर्ष इतना ज्यादा तकलीफो से गुजरा लेकिन फिर भी मैंने कभी किसी से भी अपने दिल की बात नहीं कही। मेरी पत्नी ने मेरा जीवन भर साथ दिया और जब तक वह जीवित थी तब तक तो सब कुछ अच्छे से चलता रहा लेकिन जब उसकी मृत्यु हो गई तो मैंने उसके कुछ समय बाद ही रिटायरमेंट ले लिया और सोचा कि मुझे अब अपने लिए समय निकालना चाहिए, जीवन की भाग दौड़ भरी जिंदगी में मैं अपने आप को कुछ समय देना चाहता था और उसके लिए मैंने फैसला किया कि मैं अब अपने गांव चला जाऊंगा मैंने जब यह फैसला लिया तो उस वक्त मेरे लड़के ने मुझे कहा कि पिताजी अब आप इस उमर में गांव में क्या करेंगे, मैंने उसे कहा देखो बेटा जहां मैं पैदा हुआ हूं वहां भला मैं कैसे छोड़ सकता हूं इसीलिए तो मैंने रिटायरमेंट ली और अब मुझे काफी अकेला भी लगता है, वह कहने लगा पिताजी आप हमारे साथ ही रहिये, मैंने उसे कहा देखो बेटा मैंने अब तुम्हारी शादी करा दी है और तुम अब जिम्मेदार भी हो चुके हो तुम्हारे भी बच्चे अब बड़े हो चुके हैं और अब तुम्हें उनका ध्यान रखना चाहिए।

मैंने अपने लड़के को मना लिया और कहा कि मैं बीच-बीच में तुम्हारे पास आता रहूंगा मैं जब गांव गया तो गांव में मैंने बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया और मेरा बकरी पालन का व्यवसाय काफी अच्छा चलता था मैंने गांव में कुछ नौकर भी अपने पास रख लिए थे और वह लोग सुबह के वक्त मेरे पास आ जाते हैं और शाम को वह लोग अपने घर लौट जाते, समय के साथ साथ मुझे भी गांव में रहने की आदत हो चुकी थी और अब मुझे अपने लिए समय भी मिलने लगा था, मेरा लड़का राजेंद्र मुझे हमेशा फोन कर दिया करता और मुझसे वह काफी देर तक बात किया करता था मेरे लिए उस वक्त पड़ा ही दुखद पल था जिस वक्त राजेंद्र की दुर्घटना में मृत्यु हो गई मैं अपने आप को संभाल नहीं पाया लेकिन मुझे ही अब सब कुछ संभालना था, मैं उस वक्त शहर गया तो मेरी बहू और मेरी पोती कनिका पूरी तरीके से टूट चुकी थी उन्हें मैंने उस वक्त हौसला दिया, मैंने उन्हें कहा कि तुम चिंता ना करो मैं तुम्हारे साथ हूं।

मधु कहने लगी हां पिताजी वह तो हमें पता है कि आप हमारे साथ हैं लेकिन अब राजेंद्र की कमी हमारे जीवन में भला कौन पूरी कर सकता है, मैंने उससे कहा कोई बात नहीं तुम धैर्य रखो। मैंने उस वक्त उनका हौसला बढ़ाया और उसके बाद मैं उन्हीं के साथ रहने लगा काफी समय तक तो घर का माहौल बिल्कुल भी अच्छा नहीं था और मुझे इन दोनों को संभालना पड़ा कनिका भी अब कॉलेज जाने लगी थी जिस वक्त राजेंद्र की मृत्यु हुई उसके बाद उसने भी कॉलेज जाना छोड़ दिया था धीरे-धीरे सब कुछ सही होता जा रहा था लेकिन मैं जब भी मधु के साथ बात करता तो वह हमेशा राजेंद्र की बात करती, एक दिन हम दोनों साथ में बैठे हुए थे मधु मुझसे कहने लगी पिताजी मुझे कई बार तो राजेंद्र की बहुत याद आती है, मैंने मधु से कहा देखो बेटा वह मेरा भी लड़का था और मुझे भी बहुत तकलीफ हुई लेकिन उसकी कमी को मैं तो पूरा नहीं कर सकता परंतु जब तक मैं जीवित हूं तब तक मैं तुम लोगों की देखभाल कर सकता हूं। मुझे ही अब मेरी पोती और मेरी बहू का ध्यान रखना था मैं जब भी अकेला अपने कमरे में बैठा होता तो मैं हमेशा यही सोचता कि मेरे जीवन में जैसे तकलीफों का साथ हमेशा ही बना रहेगा मैं कभी भी शांति से अपना जीवन नहीं जी पाया बचपन में भी मेरे पिता की मृत्यु जल्दी हो गई थी उसके बाद मेरी मां ने ही मेरा पालन-पोषण किया लेकिन मैं हमेशा ही सोचता कि यदि वह जीवित होते तो कितना अच्छा होता लेकिन मेरे पिताजी की कमी भी मुझे महसूस हुई, मैं जब अपनी बहू को देखता तो मैं हमेशा सोचता कि उसे भी राजेंद्र की कमी बहुत महसूस होती होगी मैं अपनी बहू के जीवन में राजेंद्र की कमी तो पूरी नहीं कर सकता था लेकिन मैंने अपनी बहू और पोती को बहुत समझाया उसके बाद वह लोग अपने जीवन में अपने आप को व्यस्त रखने लगे।

मैंने मधु से कहा कि तुम भी स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दो,  अब वह भी एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने लगी, कनिका को भी मैंने समझाया तो वह कॉलेज जाने लगी और वह कॉलेज जाने लगी तो मुझे भी अच्छा लगता लेकिन वह दोनों जब भी घर पर होते तो उन दोनों के चेहरे पर कभी भी मुस्कान नहीं होती परंतु मैंने उन्हें समझाते हुए कहा कि देखो बेटा तुम दोनों को बदलना होगा और अब तुम्हें खुश रहने की कोशिश करनी होगी हालांकि मैं भी अंदर से बहुत ज्यादा टूट चुका था लेकिन फिर भी मैंने अपनी हिम्मत नहीं हारी थी और अपनी बहू और पोती को बहुत संभाला। कनिका भी अब पहले से ज्यादा खुश रहने लगी थी और मधु भी अब खुश रहने लगी थी मैं जब उन दोनों के चेहरे पर मुस्कुराहट देखता तो मुझे बहुत अच्छा लगता है और उन दोनों की मुस्कुराहट से मैं अपने आप को खुश महसूस करता हूं, सब कुछ अब सामान्य होने लगा था मैंने भी कभी सोचा नहीं था कि वह दोनों अपने आप को इतनी जल्दी संभाल लेंगे। कनिका की उम्र भी अब होने लगी थी और उसका कॉलेज भी पूरा हो चुका था कनिका भी ज्यादा समय घर पर ही रहती थी और मधु भी अपने स्कूल में पढ़ाने में व्यस्त रहती, मैंने कनिका से कहा कि बेटा तुम कोई पार्ट टाइम नौकरी क्यों नहीं कर लेती जिससे कि तुम्हारा मन भी लगा रहेगा, वह कहने लगी दादा जी आप ठीक कह रहे हैं मुझे कहीं पार्ट टाइम नौकरी कर लेनी चाहिए।

कनिका भी पार्ट टाइम नौकरी के लिए ट्राई करने लगी और उसे एक जगह पार्ट टाइम नौकरी मिल गई जहां पर वह सुबह जाती और दोपहर तक लौट आती थी, शाम के वक्त मधु भी अपने स्कूल से लौट आती थी, मैं भी बीच-बीच में अपने गांव हो आता था जिससे कि गांव में भी मैं देखभाल कर पा रहा था कनिका और मधुरी बहुत खुश रहने लगे थे। एक दिन कनिका और मैं साथ में बैठे हुए थे हम लोग मूवी देख रहे थे मैंने कनिका से कहा कि बेटा लगता है तुम्हारे लिए भी कोई लड़का देखना पड़ेगा, कनिका कहने लगी दादा जी मैं तो शादी नहीं करने वाली और ना ही मैंने कभी इस बारे में सोचा है मैं तो हमेशा मम्मी के साथ ही रहूंगी, मैंने कनिका से कहा देखो बेटा यह संभव नहीं है और ऐसा कभी भी नहीं हो सकता तुम्हें शादी तो करनी ही पड़ेगी और उसके लिए तुम्हें अभी से तैयार होना पड़ेगा। मैंने कनिका से कहा तो कनिका कहने लगी दादा जी अभी तो मेरे पास समय है अभी तो मैंने सिर्फ अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की है। मैंने कनिका सका हां बेटा एक न एक दिन तो तुम्हे शादी करनी ही है, कनिका कहने लगी कि दादा जी मुझे यह सब अच्छा नहीं लगता और आप भी इस बारे में मुझसे बात ना करें तो अच्छा रहेगा, मैंने कनिका से कहा ठीक है बेटा मैं आज के बाद तुम से इस बारे में बात नहीं करूंगा। कनिका के चेहरे पर एक मुस्कान थी वह मेरे साथ बचपन में जैसा खेला करती थी वैसे ही वह अब भी खेला करती मैं जब भी उसकी मुस्कुराहट देखता तो अपने आप को बहुत अच्छा महसूस करता मुझे ऐसा लगता है कि जैसे मेरे जीवन में कोई भी तकलीफ नहीं है। मुझे नहीं पता था कि कनिका इतनी बड़ी हो चुकी है वह खेल खेल में ही मेरे साथ मस्ती किया करती कभी कभार तो वह मुझसे चिपक भी जाया करती थी। मैं तो हमेशा यही सोचता अब भी वह छोटी है लेकिन वह बड़ी हो चुकी है वह जब भी छोटी स्कर्ट पहनती तो उसमें उसकी जांघ साफ दिखाई देती। मैं उसे कई बार इस बात के लिए टोकता भी था लेकिन वह कहती दादा अब तो मॉडर्न जमाना है आपको तो पता ही है आजकल सब लोग ऐसे ही कपड़े पहनते हैं। मुझे नहीं पता था कि कनिका की चूत फड़फड़ाने लगी थी मैं तो इस बात का हमेशा लिहाज कर लिया करता था कि वह मेरी पोती है लेकिन एक दिन जब मैंने उसे देखा कि वह अपनी चूत के अंदर उंगली डाल रही है मैंने उसे कहा बेटा तुम यह सब क्या कर रही हो।

कनिका चुपचाप अपने स्कर्ट को नीचे कर के बैठ गई मैं उसके पास बैठ गया मैंने उसे समझाते हुए कहा। वह कहने लगी दादाजी इस उम्र में तो यह सब होता है। मैंने उसे कहा लगता है तुम्हारी शादी करवानी पड़ेगी वह कहने लगी नहीं मुझे शादी नहीं करनी। मैंने जब उसकी मोटी और गोरी जांघो पर अपने हाथ को रखा तो वह मुझसे चिपकने लगी मेरे अंदर इतने सालों बाद गर्मी पैदा होने लगी। कनिका मुझसे चिपकने लगी मैंने उसे वहीं सोफे पर लेटा दिया मेरा लंड उससे टकराने लगा था। मेरे लंड ने हिलोरे मारने शुरू कर दिए थे मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मुझे उस वक्त अपनी मर्यादाओ का ध्यान आने लगा कनिका तो मेरी पोती है लेकिन उस वक्त मैंने उसके साथ सेक्स करना ही उचित समझा। मैंने उसकी स्कर्ट को नीचे किया उसने अंदर से कुछ भी नहीं पहना था। मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो उसके मुंह से बड़ी तेज चीख निकलने लगी वह कहने लगी मैंने तो पहली बार किसी का लंड अपनी चूत में लिया है मैं तो सिर्फ पोर्न मूवी में ही देखा करती थी लेकिन दादू आपका लंड बहुत मोटा और बड़ा है। उसे बड़ा मजा आ रहा था मैं उसे चोदे जा रहा था इतनी टाइट चूत मैंने कभी  भी नहीं मारी नहीं थी मुझे इस बुढ़ापे मस्त चूत मिलेगी उसे चोदने में मुझे बड़ा ही आनंद मिल रहा था। मै लगातार उसकी चूत के मजे उठा रहा था हम दोनों ने एक साथ काफी देर तक संभोग किया जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो मुझे ऐसा लगा जैसे कि मैं किसी जन्नत में पहुंच गया हूं। उसके बाद हम दोनों चोरी छुपे हमेशा सेक्स किया करते कनिका तो मेरे रूम में ही आ जाती थी मुझे कई बार लगता यह सब गलत है परंतु वह बड़ी हो चुकी है उसे अपने फैसले लेने का खुद अधिकार है।


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