जयपुर मे दिखी लड़की

मेरा नाम रमन है मैं राजस्थान के अलवर का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 28 वर्ष है। मैं एक बार जयपुर गया था क्योंकि मुझे किसी रिश्तेदार के घर जाना था और कुछ दिन जयपुर में ही मुझे रुकना था इसीलिए मैं जयपुर चला गया। जब मैं जयपुर गया तो मुझे उनका घर पता नहीं चल रहा था क्योंकि मैं उनके घर कभी नहीं गया, किसी ने मुझे बताया कि उनका घर थोड़ा ही दूरी पर है। जब मैं उस घर के अंदर गया तो वहां सब लोग मुझे देखने लगे। मैंने उनसे पूछा कि क्या यहां पर अग्रवाल जी रहते हैं, वह कहने लगे कि नहीं यहां कोई अग्रवाल जी नहीं रहते। मैंने उनके घर मे एक सुंदर सी लड़की को देखा और मैं उसे निहारता रह गया। वह मुझसे पूछने लगे कि आपको कहां पर जाना है, मैंने उन्हें जब वह पता दिखाया तो वह कहने लगे कि यह कुछ ही दूरी पर है, मैंने उन्हें कहा कि मेरा फोन बंद हो चुका है इसीलिए मैं उनसे संपर्क नहीं कर पा रहा हूं। वह कहने लगे कोई बात नहीं हम तुम्हें छोड़ देते हैं, वही अंकल मुझे उनके घर तक छोड़ने आए और मैं उसके बाद अपने रिश्तेदार के घर पर पहुंच गया।

वह लोग मुझसे पूछने लगे कि तुम इतनी देर कहां रह गए, मैंने उन्हें सारी बात बताई और कहा कि मैं दरअसल भटक गया था और मेरा मोबाइल भी बंद हो गया था इसलिए मुझे आपका घर नहीं मिल पा रहा था। वह लोग कहने लगे कोई बात नहीं कभी कबार ऐसा हो जाता है। मैं कुछ काम के सिलसिले में उनके पास गया था क्योंकि वह लोग मेरी मम्मी के रिश्तेदार हैं और मेरी मम्मी के रिश्ते में हो भाई लगते हैं। उनका हमारे घर पर काफी आना जाना है परंतु मैं उनके घर पर ज्यादा नहीं गया और जब मैं उसे उनके घर पर रहा था तो मुझे उनसे काफी कुछ चीजें सीखने को मिली और उनका बहुत बड़ा कारोबार है इसलिए मैं उनके साथ ही काफी दिन तक रुक गया। उनसे कुछ सामान भी मैंने खरीद लिया और कहा कि मैं आपको इसके पैसे बाद में दूंगा। वह कहने लगे कोई बात नहीं तुम मुझे इसके पैसे बाद में दे देना। अब मैं अलवर लौट आया लेकिन मेरे दिमाग में अभी उस लड़की की तस्वीर थी और मैं सोचने लगा कि काश वह लड़की मुझे मिल जाती तो मैं उसे जरूर बात कर लेता लेकिन शायद अब यह मेरे लिए एक सपना ही बनकर रह गया था और फिर मैं भी अपने काम पर व्यस्थ रहने लगा।

एक दिन जब मैं अपने घर से अपने किसी मित्र के पास जा रहा था तो मुझे रास्ते में वही लड़की दिखाई दी जो मुझे जयपुर में दिखी थी। मैंने उसे देखते ही पहचान लिया और मैं जब उसके पास गया तो मैंने उससे पूछा कि क्या तुमने मुझे पहचाना, वह कहने लगी नहीं मैंने आपको नहीं पहचाना। मैंने जब उसे बताया कि काफी समय पहले मैं रास्ता भटक गया था और तुम्हारे घर पर आ गया था, फिर तुम्हारे पिताजी ने हीं मुझे मेरे रिश्तेदार के घर तक पहुंचाया था। फिर उसे ध्यान आया, वह कहने लगी हां मुझे याद आ गया, जब उसने यह बात मुझसे कही तो मैं बहुत खुश हुआ और मैंने उसे पूछा कि तुम यहां कहां जा रही हो, वह कहने लगी कि मैं कुछ काम के सिलसिले में यहां आई थी। मैंने उससे पूछा तुम यहां कहां पर रुकी हो, वह कहने लगी कि मेरी एक सहेली यही रहती है और मैं उसके पास ही रुकी हूं। बातों बातों में मैं उसका नाम ही पूछना भूल गया, जब मैंने उसका नाम पूछा तो उसने मुझे अपना नाम बताया, उसका नाम अंशिका है। मैंने अंशिका से कहा कि मैं तुम्हें उसके घर तक छोड़ देता हूं, वह कहने लगी नहीं मैं चली जाऊंगी लेकिन मैंने अंशिका से जिद की और उसके बाद मैं उसे उसकी सहेली के घर तक छोड़ने चला गया। जब मैं उसके साथ जा रहा था तो मैंने उससे रास्ते में काफी बात करी तो मैंने उसे पूछा कि तुम क्या कर रही हो,  वह कहने लगी कि मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रही हूं और यह मेरा आखिरी वर्ष है। मैंने अंशिका से कहा यह तो बहुत अच्छी बात है यदि तुम कॉलेज में पढ़ाई कर रही हो। मैंने अंशिका से पूछा कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद तुम क्या करने वाली हो, वह कहने लगी कि मेरे घरवाले तो मेरे लिए रिश्ता ढूंढने लगे हैं और अभी से ही वह लोग मेरी शादी के बारे में सोच रहे है लेकिन मैं नहीं चाहती कि मैं अभी से शादी करूं, मैं शादी के पक्ष में बिल्कुल भी नहीं हूं। बातों बातों में उसकी सहेली का घर आ गया और मैंने उसे उसकी सहेली के घर पर छोड़ दिया, उसके बाद मैं अपने काम पर चला गया। अगले दिन मैं दोबारा उसकी सहेली के घर के पास चला गया।

मैं उसकी सहेली के घर के बाहर ही उसका इंतजार करने लगा, जब अंशिका आई तो वह मुझसे पूछने लगी कि तुम यहां पर क्या कर रहे हो, मैंने उसे कहा कि मैं यहां कुछ काम से आया था। वह समझ चुकी थी कि मैं जानबूझकर उसकी सहेली के घर के बाहर खड़ा था लेकिन उसने भी यह बात मुझसे नहीं कहीं और हम दोनों ही साथ साथ चलने लगे। मुझे अंशिका के साथ बात करना अच्छा लग रहा था और वह भी मुझसे बात करते हुए खुश हो रही थी। बातों बातों में मैंने अंशिका से पूछ लिया कि क्या तुम किसी के साथ प्रेम करती हो। वह कहने लगी नहीं मैं किसी के साथ भी प्रेम नहीं करती। मैंने अंशिका से कहा कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और जब मैंने तुम्हें पहली बार देखा था तो तब से ही मेरे दिमाग में तुम्हारी तस्वीर छप गई थी। मैं जब जयपुर से अलवर लौटा तो उसके बाद भी मैं तुम्हारे बारे में ही सोचता रहा। अंशिका कहने लगी क्या वाकई में मैं तुम्हें अच्छी  लगती हूं मैंने उसे कहा कि हां तुम मुझे बहुत ही अच्छी लगती हो और तुम्हारा यौवन बहुत ही सुंदर है तुम्हारा बदन देख कर तो मैं पागल हो गया। मैंने अंशिका का हाथ पकड़ लिया उसने भी मुझे कुछ नहीं कहा और मैने उसके हाथ को जोर से दबाया तो वह समझ चुकी थी की मेरे दिल में कुछ चल रहा है। जब मैं उसे अपने घर ले गया तो मैंने उसे अपने घर वालों से मिलाया और उसके बाद में उसे अपने कमरे में ले गया।

अंशिका मेरे बगल में ही बैठी हुई थी और उसने जो सूट पहना हुआ था उससे उसका पूरा बदन बाहर की तरफ को झाक रहा था। मैंने जैसे ही उसकी जांघ पर हाथ रखा तो वह मचलने लगी और वह मुझसे दूर होकर बैठ गई लेकिन मैंने दोबारा से धीरे धीरे उसके जांघ पर अपने हाथ को रख दिया और उसके जांघ को सहलाने लगा उसे भी अब अच्छा लगने लगा वह पूरे मूड में आने लगी। मैंने भी उसकी जांघ को बड़ी तेजी से दबा दिया और मैंने उसे कसकर पकड़ लिया। मैंने उसके बदन को बड़े जोर से दबाया जिससे कि वह मेरे पूरे बस में थी और मैंने भी उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया। जब मैंने अंशिका को नंगा किया तो उसकी पिंक कलर की पैंटी ब्रा देखकर मेरा मन मचलने लगा और मैंने भी उसकी पैंटी के बाहर से ही अपने हाथ को फेरना शुरू कर दिया और उसकी चूत पूरी गिली हो गई वह पूरे मूड में आ चुकी थी। मैंने उसे कहा कि क्या तुम मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसोगी वह कहने लगी नहीं मैंने किसी का भी लंड अपने मुंह में नहीं लिया लेकिन मैंने उसे जबरदस्ती किया वह मेरे लंड को अपने मुह मे लेने लगी वह अपने मुंह के अंदर तक मेरे लंड को ले रही थी और बहुत ही अच्छे से वह सकिंग करने लगी। काफी देर तक उसने ऐसा किया उसके बाद जब मैंने उसकी मुलायम और चिकनी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ और मैंने उसे तजी से चोदना शुरू कर दिया और वह भी अब पूरे मूड में आ चुकी थी। मैं भी उसे बड़ी तेज गति से चोद रहा था अशिंका मुझसे कहने लगी कि तुम्हारा लंड अपनी चूत मे लेकर मुझे बड़ा मजा आ रहा है। मैंने उसे कहा कि मैं तो तुम्हें अपने सपने में भी देखता हूं और कई बार तो मेरा माल भी गिर जाता है जब मै तुम्हारे बारे में ही सोचते हू लेकिन आज मैं तुम्हें चोद रहा हू तो मुझे बहुत ही मजा आ रहा है। मैं ज्यादा समय तक अंशिका की योनि की गर्मी को नहीं झेल पाया क्योंकि वह मेरी सपनों की राजकुमारी है इसीलिए मैं उसे ज्यादा समय तक नहीं चद पाया और जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अपने वीर्य को अंशिका के स्तनों पर गिरा दिया। अंशिका जितने दिन भी अपनी सहेली के पास रुकी मैंने उसे उतने दिन तक चोदा।


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